भूमिका
आदिवासी लेखन : एक उभरती चेतना
मराठी
आदिवासियों की अब तक की साहित्य-यात्रा: डॉ. विनायक तुमराम
आज अगर खामोश रहे, तो कल सन्नाटा छाएगा : वाहरू सोनवणे
आदिवासी साहित्य क्यों? भुजंग मेश्राम
आदिवासी कविता : एक आकलन : डॉ. राजेन्द्र ठाकरे
मराठी कविता में आदिवासी चेतना : दोमोदर मोरे
खड़िया
खड़िया जाति का इतिहास-बोध और साहित्य : रोज केरकेट्टा
खड़िया भाषा का रचना-संसार : रोज केरकेट्टा
संताली
संताली साहित्य : मौखिक अभिव्यक्ति का स्वर : कृष्णचन्द्र्र टुड्डू
कुडुख
आदिवासी महिलाएँ और साहित्य : रेमिस कुंडला
कुडुख लोकगीतों में युध्द-वर्णन : अजय तिर्की
बोडो
बोडो साहित्य सभा : मूल्यांकन : सोभा ब्रह्मा
बोडो साहित्य का काल विभाजन : मधुराम बोडो
बोडो लिखित-साहित्य का परिचय : स्वर्ण प्रभा चैनारी
राभा
राभा भाषा में साहित्य-लेखन : फुकन चन्द्र बसुमतारी
राभा काव्य साहित्य की एक झलक : रूपक कुमार राभा
राभा भाषा एवं साहित्य के अनुदृश्य : नीवारानी फुकन गोगोई
गारो
गारो लिखित-साहित्य का परिचय : स्वर्ण प्रभा चैनारी
कोकबोरोक
सृजन की एक ऊधर्वमुखी सदी : नन्दकुमार देव वर्मा
मिजो
मिजो भाषा एवं साहित्य की विकास
यात्रा : एक जायजा : डॉ. लल्टलुआंगलियाना खियांग्टे
मिजो साहित्य का अन्य साहित्य के
सन्दर्भ में आकलन : आर. थंगबुंगा
मिजो नाटक की उत्पत्तिा और विकास : प्र. एल.टी. लियान लिखियां. डटे
खासी
खासी काव्य साहित्य : आर.टी. रिम्बई
खासी पहाड़ियों के कुहासे में अंग्रेजी
कविता के भंवर : सुमन्यु सत्पथि
का जिंगस्तेंग तिम्मेन : खासी-जैन्तिया
प्रकृति का आईना : आर.टी. रिम्बई
एक कवि की दृष्टि में खासी
लोकतन्त्र : एक विश्लेषण : किनफामसिं नौगकिनरिह |