मेरे साक्षात्कार
दलित लेखिकाएँ स्त्री-मुक्ति के सवाल पर चुप हैं
(मजीद अहमद से बातचीत)
दलितों की समस्या आर्थिक नहीं, सामाजिक है
(शगशुफ्ता नियाज़ से बातचीत)
दलित जाति नहीं जमात बने
(सूरज बड़त्या और वीणा शर्मा से बातचीत)
दलित साहित्य को अवतारवाद के खतरे हैं
(श्यौराज सिंह बेचैन से बातचीत)
मेरी लड़ाई हमेशा गैर-बराबरी से रही है
(मधु वासुदेवन से बातचीत)
भारत में वर्ण की लड़ाई, एक-दूसरे की पूरक है
(प्रो. बलदेव पाण्डे से बातचीत)
भोगे हुए यथार्थ पर लिखा गया साहित्य ही दलित साहित्य
(जयन्त परमार से बातचीत)
आत्मनिर्भरता : अभी भी दलित स्त्री का सपना
(राजेश कुमार से बातचीत)
मैं साहित्य की जनपक्षधरता में विश्वास करती हूँ
(ओमप्रकाश शर्मा 'कृत्यांश' से बातचीत)
स्त्री-मुक्ति की मुहिम को पुरुष समर्थन की दरकार है
(कमर मेवाड़ी से बातचीत)
आत्मकथाओं में शर्म की परतें खुलती हैं
(हरे प्रकाश उपाध्याय से बातचीत)
जो औरत अपने बल पर खड़ी हो सकती है, उसे पुरुष बख्शता नहीं है
(शकील से बातचीत)
स्त्री और दलित अपनी लड़ाई खुद लड़ें
(कुसुम विद्यार्थी से बातचीत)
स्त्रियों की यौन शुचिता के मूल्यांकन की विरोधी हूँ
(पंकज चौधारी से बातचीत)
कविता में स्त्री: समय को देती है शब्द
(सुधा और ज्योति से बातचीत) |